आज बात करेंगे जेपी मॉर्गन के उस प्रस्ताव की, जिसने भारत ही नहीं, चीन, मेक्सिको और इंडोनेशिया जैसे बड़े देशों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।
यह प्रस्ताव आने वाले समय में इन देशों के सरकारी बॉन्ड्स में होने वाले अरबों डॉलर के निवेश को प्रभावित कर सकता है। तो आखिर क्या है जेपी मॉर्गन का यह कदम और छोटे देशों के लिए यह कैसे एक मौका बन सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं।

जेपी मॉर्गन का इंडेक्स क्या है
दरअसल जेपी मॉर्गन के पास एक बड़ा इंडेक्स है — GBI-EM Global Diversified Index, यानी Government Bond Index for Emerging Markets। इस इंडेक्स को दुनियाभर के बड़े निवेशक फॉलो करते हैं और अपनी रणनीति इसी के हिसाब से बनाते हैं। इस इंडेक्स के ज़रिए करीब 200 अरब डॉलर यानी 16-17 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश तय होता है।
इस इंडेक्स में उन्हीं देशों को जगह मिलती है जिनके सरकारी बॉन्ड्स में निवेशक पैसा लगाना चाहते हैं। भारत को इस इंडेक्स में सितंबर 2023 में शामिल किया गया था। उस वक्त उम्मीद जताई गई थी कि भारत में 20–25 अरब डॉलर का अतिरिक्त विदेशी निवेश आ सकता है।
अब जेपी मॉर्गन क्या बदलाव करने जा रहा है?
अब जेपी मॉर्गन इस इंडेक्स में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। अभी किसी भी देश का वज़न यानी हिस्सा इस इंडेक्स में 10% तक रखा जाता है। लेकिन नए प्रस्ताव के मुताबिक इसे घटाकर 8.5% किया जा सकता है।
अगर ऐसा होता है तो भारत, चीन, मेक्सिको और इंडोनेशिया जैसे बड़े बॉन्ड बाजारों का हिस्सा इस इंडेक्स में घट जाएगा। यानी इन देशों के सरकारी बॉन्ड्स में निवेश की संभावना भी थोड़ी कम हो जाएगी। दूसरी तरफ ब्राजील, पोलैंड, कोलंबिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों का हिस्सा बढ़ सकता है।
जेपी मॉर्गन का मानना है कि इससे इंडेक्स ज्यादा विविधतापूर्ण होगा और किसी एक देश पर बहुत ज्यादा निर्भरता नहीं रहेगी।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत के लिए यह थोड़ा चिंताजनक हो सकता है। क्योंकि पिछले साल इंडेक्स में एंट्री के बाद भारत के बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी थी। अगर अब हिस्सा घटेगा तो निवेश का प्रवाह भी कुछ कम हो सकता है।
हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अभी मजबूत है, ग्रोथ अच्छी है और बॉन्ड यील्ड भी करीब 7% के आसपास है। इसलिए लंबी अवधि में भारत की स्थिति स्थिर रह सकती है।
चीन और दूसरे देशों पर असर
चीन को भी इस प्रस्ताव से नुकसान हो सकता है। इससे पहले 2023 में भी जेपी मॉर्गन ने चीन का वेट घटाने का सुझाव दिया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। चीन का बॉन्ड बाजार बहुत बड़ा है, लेकिन वहां पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता और पारदर्शिता की कमी निवेशकों को थोड़ा डराती है।
मेक्सिको और इंडोनेशिया जैसे देशों का भी वेट कम हो सकता है, लेकिन छोटे देशों जैसे ब्राजील, पोलैंड और दक्षिण अफ्रीका को फायदा होगा।
छोटे देशों के लिए बड़ा मौका?
जेपी मॉर्गन का यह कदम छोटे और मध्यम आकार के देशों के लिए अच्छा मौका साबित हो सकता है। ज्यादा डायवर्सिफिकेशन का मतलब है कि निवेश और ज्यादा देशों में बंटेगा, जिससे छोटे देशों के बॉन्ड मार्केट को फंड्स मिल सकते हैं।
इसके साथ ही जेपी मॉर्गन एक और इंडेक्स लॉन्च करने की योजना बना रहा है — Frontier Local Market Index, जिसमें 21 देशों की 20 मुद्राएं और 500 से ज्यादा बॉन्ड्स शामिल होंगे। इसका आकार करीब 344 अरब डॉलर हो सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करना पड़ सकता है। यानी कुछ बॉन्ड्स बेचना और नए देशों के बॉन्ड्स खरीदना होगा। शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इंडेक्स मजबूत हो जाएगा और छोटे देशों के लिए फंड्स का रास्ता खुल सकता है।
F.A.Q.
– जेपी मॉर्गन का GBI-EM Global Diversified Index क्या है?
यह एक प्रमुख बॉन्ड इंडेक्स है, जिसमें उभरते हुए बाजारों (Emerging Markets) के सरकारी बॉन्ड शामिल होते हैं। दुनियाभर के बड़े निवेशक इस इंडेक्स को फॉलो करते हैं और इसमें शामिल देशों के बॉन्ड्स में अरबों डॉलर का निवेश होता है।
– भारत को इस इंडेक्स में कब और क्यों शामिल किया गया था?
भारत को सितंबर 2023 में इस इंडेक्स में शामिल किया गया था। इसका मकसद विदेशी निवेश को आकर्षित करना और भारतीय बॉन्ड मार्केट को वैश्विक निवेशकों के लिए और अधिक खुला बनाना था।
– जेपी मॉर्गन अब कौन सा बदलाव करने जा रहा है?
जेपी मॉर्गन प्रस्ताव दे रहा है कि किसी भी देश का अधिकतम वज़न इस इंडेक्स में 10% से घटाकर 8.5% कर दिया जाए। इससे बड़े देशों का हिस्सा कम होगा और छोटे देशों को ज्यादा मौका मिलेगा।
– भारत और चीन जैसे बड़े देशों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
इस बदलाव से भारत, चीन, मेक्सिको और इंडोनेशिया जैसे बड़े देशों के बॉन्ड्स में विदेशी निवेश का प्रवाह कुछ घट सकता है। हालांकि लंबी अवधि में भारत की स्थिति मजबूत रहने की संभावना है।
– छोटे देशों के लिए यह प्रस्ताव क्यों फायदेमंद हो सकता है?
छोटे और मध्यम आकार के देशों का वज़न बढ़ने से उनके बॉन्ड मार्केट में ज्यादा विदेशी फंड आ सकते हैं। यह उनके लिए पूंजी जुटाने का अच्छा मौका बन सकता है और बाजारों में विविधता भी बढ़ेगी।
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