पिछले कुछ दिनों से एक सवाल निवेशकों के बीच चर्चा में है — क्या विदेशी ब्रोकरेज हाउसेस अब भारत पर पहले जितना भरोसा नहीं कर रहे? इस चर्चा को हवा दी है अमेरिका की जानी-मानी फाइनेंशियल फर्म सिटी ग्रुप ने। फरवरी 2025 में जहां उन्होंने भारतीय शेयर बाजार को ओवरवेट बताया था, अब उन्होंने रेटिंग घटाकर न्यूट्रल कर दी है।
सवाल यह उठता है कि क्या यह भारत की विकास गाथा के रुकने का संकेत है? या चीन और कोरिया जैसे बाजार अब ज्यादा बेहतर दिख रहे हैं? इस लेख में हम इसे आसान भाषा में समझेंगे और यह भी देखेंगे कि निवेशकों के लिए आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए।

सिटी ग्रुप ने भारतीय शेयर बाज़ार की रेटिंग क्यों घटाई?
सिटी ग्रुप दुनिया की सबसे बड़ी फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों में से एक है और करीब 215 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का फंड मैनेज करती है। फरवरी में उन्होंने भारत की रेटिंग ओवरवेट इसलिए दी थी क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि यहां टैक्स कट्स, बढ़ती खपत, सरकारी निवेश और सस्ते कर्ज की वजह से कंपनियों की कमाई तेज़ी से बढ़ेगी। उन्होंने मार्च 2025 तक निफ़्टी को 26,000 तक जाने की संभावना जताई थी।
लेकिन कुछ महीनों में हालात बदले। कंपनियों की कमाई (EPS) उम्मीद के मुताबिक़ नहीं बढ़ी। शेयरों की कीमत पहले से ही ऊँचाई पर है, यानी बाजार महंगा हो गया। ऐसे में उन्हें लगा कि भारत अब उतना आकर्षक नहीं रह गया। इस वजह से उन्होंने रेटिंग को न्यूट्रल कर दिया। न्यूट्रल का मतलब न बहुत अच्छा और न ही बहुत बुरा, बस औसत।
चीन और कोरिया पर भरोसा क्यों बढ़ा?
भारत की रेटिंग घटाते हुए सिटी ने चीन और कोरिया को ओवरवेट कर दिया। उनके मुताबिक इन देशों में वैल्यूएशन अभी भी सस्ते हैं और कमाई की संभावनाएं ज्यादा दिख रही हैं।
- चीन में टेक सेक्टर में इस साल अब तक 20% से ज्यादा की रैली आई है।
- कोरिया में भी कंपनियों के मुनाफ़े और कीमत के अनुपात (valuation) बेहतर दिख रहे हैं।
सिटी का मानना है कि चीन के तकनीकी शेयरों में निवेशकों का भरोसा वापस आ रहा है और कोरिया में भी अच्छे मौके हैं। हालांकि यह भी ध्यान देना चाहिए कि इन देशों में राजनीतिक और नीतिगत जोखिम ज्यादा हैं, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं।
भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी अब भी मजबूत
जब कोई बड़ी ब्रोकरेज भारत की रेटिंग घटाती है तो निवेशक डर जाते हैं। लेकिन लंबी अवधि में तस्वीर कुछ और ही है।
भारत में अब भी कई मजबूत फैक्टर काम कर रहे हैं —
- बड़ी और युवा आबादी
- बढ़ती खपत और शहरीकरण
- डिजिटलाइजेशन
- इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश
- मैन्युफैक्चरिंग में चीन का विकल्प बनने की संभावना
इसके अलावा, भारत में विदेशी निवेश (FDI) भी लगातार बढ़ रहा है। यह सब संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था की गति बनी रहेगी।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए?
सिटी ग्रुप की रेटिंग से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना ज़रूरी है। न्यूट्रल रेटिंग का मतलब है कि अब हर स्टॉक में पैसा लगाने के बजाय चुनिंदा सेक्टर और मजबूत कंपनियों पर ध्यान दें।
- बैंकिंग
- इंफ्रास्ट्रक्चर
- डिफेंस
- रिन्यूएबल एनर्जी
ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां कमाई की संभावना अब भी मजबूत है।
अगर आप शॉर्ट टर्म में ट्रेड करते हैं तो फिलहाल थोड़ा सावधानी से चलें। और अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं तो अच्छे शेयरों में टिके रहना बेहतर होगा।
निष्कर्ष
सिटी ग्रुप की रिपोर्ट बताती है कि भारत में अब सोच-समझकर निवेश करने का समय आ गया है। बाजार भले महंगे हो गए हों, लेकिन भारत की बुनियादी मजबूती अब भी बरक़रार है। चीन और कोरिया जैसे बाजारों में भी मौके हैं, लेकिन वहां जोखिम भी ज्यादा है।
तो निवेश कीजिए, लेकिन समझदारी के साथ। अपने पोर्टफोलियो में मजबूत और भरोसेमंद कंपनियों को जगह दीजिए और लंबी अवधि पर नजर बनाए रखिए।
F.A.Q.
– सिटी ग्रुप की रेटिंग घटने का मतलब क्या है?
सिटी ग्रुप ने भारत की रेटिंग ओवरवेट से न्यूट्रल कर दी है। इसका मतलब है कि अब वे भारत से ज्यादा न तो उम्मीद कर रहे हैं और न ही कोई नकारात्मक दृष्टिकोण रख रहे हैं। यानी बाजार औसत प्रदर्शन करेगा और अब सोच-समझकर निवेश करने की जरूरत है।
– क्या अब भारत में निवेश करना ठीक रहेगा?
हां, लेकिन पहले जैसी तेजी की उम्मीद फिलहाल कम हो सकती है। अब चुनिंदा सेक्टर और मजबूत कंपनियों में ही निवेश करना समझदारी होगी। लंबे समय में भारत की अर्थव्यवस्था अब भी मजबूत बनी हुई है।
– क्या चीन और कोरिया में निवेश करना ज्यादा अच्छा रहेगा?
चीन और कोरिया में फिलहाल वैल्यूएशन सस्ते हैं और वहां के टेक सेक्टर में तेजी है। लेकिन वहां राजनीतिक और नीतिगत जोखिम भारत से ज्यादा हैं। इसलिए वहां निवेश करते समय सावधानी बरतना जरूरी है।
– क्या भारतीय बाजार महंगा हो चुका है?
सिटी ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बाजार फिलहाल महंगे स्तर पर है। कंपनियों की कमाई के मुकाबले शेयरों के दाम काफी ऊपर हैं। यही वजह है कि उन्होंने रेटिंग घटाई।
– कौन-कौन से सेक्टर अभी भी अच्छे माने जा सकते हैं?
बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर में अब भी अच्छी संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में मांग बनी हुई है और सरकार का भी समर्थन मिल रहा है।
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