Eternal ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (Q1FY26) के नतीजे जारी कर दिए हैं। नतीजे मिले-जुले रहे — जहां एक तरफ़ राजस्व में करीब 70% की शानदार बढ़त दर्ज की गई, वहीं मुनाफ़ा पिछली साल की तुलना में करीब 90% गिरकर रह गया।
कंपनी ने ₹7,167 करोड़ का राजस्व कमाया, जो पिछले साल ₹4,206 करोड़ था। लेकिन शुद्ध लाभ ₹253 करोड़ से गिरकर महज़ ₹25 करोड़ रह गया। इस भारी गिरावट की वजह ब्लिंकिट के विस्तार और बढ़ते खर्च बताए जा रहे हैं। आइए इन नतीजों को चार हिस्सों में समझते हैं।

Eternal का राजस्व: तेज़ी से बढ़ती कमाई
Eternal ने इस तिमाही में ₹7,167 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹4,206 करोड़ के मुकाबले करीब 70% ज़्यादा है। कंपनी का कहना है कि इस बढ़त के पीछे दो अहम कारण हैं — ब्लिंकिट के ज़रिए तेज़ डिलीवरी नेटवर्क का विस्तार और Zomato के ऑर्डर वॉल्यूम में इज़ाफ़ा।
ब्लिंकिट ने तिमाही में 294 नए आउटलेट जोड़े, जिससे डिलीवरी क्षमता बढ़ी और ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा सकी। Zomato की ओर से भी नए रेस्टोरेंट पार्टनर्स और स्नैक्स सेगमेंट की मांग में सुधार हुआ, जिससे ऑर्डर वॉल्यूम बेहतर हुआ।
मुनाफ़ा घटा क्यों? खर्चों ने दबाव डाला
जहां राजस्व में अच्छा उछाल देखने को मिला, वहीं Eternal का शुद्ध मुनाफ़ा 90% घटकर केवल ₹25 करोड़ रह गया। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी के परिचालन खर्चों में तेज़ी से बढ़ोतरी रही। इस तिमाही में खर्च करीब 77% बढ़ गए।
Q4FY25 से ही ब्लिंकिट के विस्तार पर ज़ोर दिया जा रहा था। Q1 में इसका असर पूरी तरह दिखा। नए आउटलेट, तेज़ डिलीवरी नेटवर्क, तकनीकी निवेश और कर्मचारियों पर ज्यादा खर्च के कारण मार्जिन पर दबाव पड़ गया।
कंपनी के लिए अब यह चुनौती है कि तेज़ विकास और मुनाफ़े के बीच सही संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।
Eternal के शेयर की चाल: अप्रैल से 34% की रैली
Eternal के नतीजों से पहले शेयर में अच्छी मजबूती देखने को मिली। 21 जुलाई को दोपहर तक शेयर 3.68% चढ़कर ₹259.65 से ₹266.65 पहुंच गया।
अप्रैल के निचले स्तर से अब तक शेयर में करीब 34% की रैली आ चुकी है। फिलहाल यह ₹262–₹272 के दायरे में कारोबार कर रहा है।
तकनीकी संकेतकों के हिसाब से शेयर में फिलहाल सकारात्मक रुझान दिख रहा है। Morgan Stanley ने Eternal का लक्ष्य ₹320 बताया है। उनका मानना है कि कंपनी की तेज़ी से बढ़ती डिलीवरी क्षमता, अतिरिक्त इक्विटी डाइल्यूशन न होने और मजबूत राजस्व वृद्धि से यह लक्ष्य हासिल हो सकता है।
आगे की राह: क्या उम्मीद की जा सकती है?
आने वाले महीनों में निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि Eternal कैसे अपने खर्चों पर काबू पाती है। ब्लिंकिट के खर्च फिलहाल मुनाफ़े को खा रहे हैं, लेकिन राजस्व में बढ़ोतरी का आधार भी यही है।
Q2FY26 में सभी की नज़र इस बात पर रहेगी कि क्या Eternal राजस्व को बनाए रखते हुए मुनाफ़े में सुधार कर पाती है।
साथ ही, शेयर के लिए यह देखना दिलचस्प रहेगा कि क्या यह ₹320 के अनुमानित लक्ष्य की तरफ़ बढ़ पाता है या तकनीकी रूप से कोई गिरावट आती है।
Zomato की बात करें तो इसका शेयर भी Q1 नतीजों से पहले ₹257–₹260 के बीच कारोबार कर रहा था। पिछले एक साल में इसमें करीब 21% की बढ़त आई है और एनालिस्ट मान रहे हैं कि अगले 12 महीनों में इसमें 9–10% और बढ़त संभव है।
निष्कर्ष
Eternal के Q1FY26 नतीजे यह बताते हैं कि कंपनी फिलहाल विकास की राह पर है, लेकिन इस रफ्तार को बनाए रखते हुए मुनाफ़ा बढ़ाना इसकी सबसे बड़ी चुनौती होगी। राजस्व में तेज़ी और शेयर की मजबूती निवेशकों के लिए अच्छा संकेत हैं, लेकिन बढ़ते खर्च और घटते मुनाफ़े पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
कंपनी के लिए ब्लिंकिट की लागतों को काबू में लाना और Zomato के मार्जिन को बेहतर करना अगले कुछ तिमाहियों में अहम साबित होगा। फिलहाल, Eternal का प्रदर्शन उम्मीद जगाने वाला तो है, लेकिन सतर्क रहने की भी सलाह दी जा सकती है।
F.A.Q.
– Eternal का Q1FY26 में मुनाफ़ा क्यों घट गया?
Eternal का मुनाफ़ा इस तिमाही में इसलिए गिरा क्योंकि ब्लिंकिट के विस्तार और तेज़ डिलीवरी नेटवर्क पर कंपनी ने भारी खर्च किया। परिचालन खर्च करीब 77% बढ़ने से लाभप्रदता पर दबाव पड़ा।
– कंपनी का राजस्व कितना बढ़ा?
Eternal का राजस्व इस तिमाही में ₹7,167 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹4,206 करोड़ था। यानी करीब 70% की तेज़ बढ़त दर्ज की गई।
– Eternal का शेयर प्राइस कितना बढ़ा?
Eternal का शेयर अप्रैल के निचले स्तर से अब तक करीब 34% ऊपर आ चुका है। नतीजों से पहले यह ₹266.65 तक पहुंच गया था।
– Morgan Stanley ने शेयर का टारगेट क्या बताया है?
Morgan Stanley ने Eternal का शेयर लक्ष्य ₹320 बताया है। उनका मानना है कि मजबूत राजस्व और इक्विटी डाइल्यूशन न होने से शेयर आगे और बढ़ सकता है।
– आगे निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
निवेशकों को कंपनी के खर्चों पर नियंत्रण, ब्लिंकिट की लागत में कमी और मुनाफ़े में सुधार पर नज़र रखनी चाहिए। साथ ही, Q2 के नतीजों में इनका असर साफ़ दिखाई देगा।
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