भारतीय रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) ने अपने वित्त वर्ष 2025–26 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) इस तिमाही में ₹1,746 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹1,577 करोड़ से लगभग 11% ज्यादा है। यानी कंपनी की कमाई में steady बढ़त देखने को मिल रही है।
अगर कुल राजस्व की बात करें तो यह ₹6,915–6,918 करोड़ के बीच रहा, जो साल दर साल करीब 2.2% की बढ़त है। राजस्व में यह हल्की बढ़त बताती है कि कंपनी का बिज़नेस स्थिर है, और उसमें धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

IRFC के NIM और बैलेंस शीट पर नज़र
IRFC का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) भी इस बार बढ़कर 1.53% तक पहुँच गया, जो पिछले तीन सालों में सबसे ऊँचा स्तर है। NIM का बढ़ना इस बात का संकेत है कि कंपनी अपनी लागत और मुनाफे के बीच संतुलन अच्छी तरह बना पा रही है।
कंपनी की कुल संपत्ति अब ₹4.80 लाख करोड़ हो चुकी है और नेट वर्थ यानी शुद्ध पूंजी ₹54,424 करोड़ तक पहुँच गई है। यह अब तक की सबसे मजबूत स्थिति मानी जा रही है।
एक और अच्छी बात यह है कि IRFC ने अपनी किताब में zero NPA (non-performing assets) बनाए रखे हैं। यानी कंपनी के दिए गए कर्ज़ों में कोई खराब ऋण नहीं है। साथ ही, प्रति शेयर बुक वैल्यू भी बढ़कर ₹41.65 हो गई है।
IRFC शेयर प्राइस की चाल कैसी रही?
अब अगर शेयर प्राइस की बात करें तो यहाँ तस्वीर थोड़ी अलग नज़र आती है। साल की शुरुआत से अब तक IRFC का शेयर करीब 12–13% गिर चुका है। और पिछले एक साल में देखा जाए तो शेयर में लगभग 35–36% की गिरावट हुई है।
आज नतीजों के दिन शेयर ₹134–135 के आसपास ट्रेड हो रहा था। लेकिन नतीजों के बाद शेयर थोड़ा और फिसलकर ₹130.80 पर बंद हुआ। इसमें लगभग 2.7% की गिरावट दर्ज की गई।
तकनीकी विश्लेषण क्या कहता है?
तकनीकी चार्ट्स पर नज़र डालें तो शेयर फिलहाल अपने 50-दिन और 200-दिन की मूविंग एवरेज (EMA) से नीचे ट्रेड कर रहा है। यह संकेत है कि निकट भविष्य में शेयर पर थोड़ा दबाव रह सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक शेयर ₹136 के स्तर को पार नहीं कर लेता, तब तक इसमें नया निवेश करने से बचना चाहिए। जिन निवेशकों का नज़रिया लंबी अवधि का है, उनके लिए “Buy on dips” यानी गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी करने की सलाह दी जा रही है।
तकनीकी रूप से शेयर को ₹130 और ₹120 के स्तर पर समर्थन मिल सकता है। और अगर सुधार होता है तो यह ₹145–₹160 तक जा सकता है।
निवेशकों के लिए सुझाव
अगर आपने पहले से IRFC के शेयर खरीद रखे हैं तो विश्लेषक सलाह दे रहे हैं कि ₹132 के नीचे स्टॉप लॉस रखना समझदारी होगी। इससे अगर गिरावट तेज होती है तो नुकसान थोड़ा सीमित रह सकता है।
जो लोग ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं, उनके लिए गिरावट पर थोड़ी-थोड़ी खरीदारी करने का विकल्प खुला है। कंपनी की मौजूदा वित्तीय स्थिति काफी मजबूत है और लंबी अवधि में इसके चलते मुनाफे की संभावना बनी रहती है।
निवेशकों के लिए मुख्य बात
IRFC की बुनियाद मजबूत है—राजस्व और मुनाफा बढ़ रहा है, NIM ऊँचा है, और बैलेंस शीट साफ-सुथरी है। लेकिन शेयर की मौजूदा चाल थोड़ी सुस्त है और तकनीकी दबाव दिखाई दे रहा है।
अगर आप नए निवेशक हैं तो सलाह यही है कि ₹136 के ऊपर का ब्रेकआउट देखें या फिर ₹130–₹132 के आसपास मिलने पर ही खरीदारी पर विचार करें।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर IRFC के Q1 नतीजे अच्छे रहे—मुनाफा, मार्जिन और संपत्ति में सुधार देखने को मिला। कंपनी की स्थिति लंबी अवधि के निवेश के लिए भरोसेमंद नज़र आती है। लेकिन तकनीकी चार्ट के हिसाब से फिलहाल थोड़ी सावधानी जरूरी है। अगर शेयर ₹136 के ऊपर जाता है तो यह एक अच्छा संकेत होगा, और नीचे आने पर भी धीरे-धीरे खरीदारी की जा सकती है।
F.A.Q.
– IRFC का Q1 FY26 का मुनाफा कितना बढ़ा?
IRFC ने Q1 में ₹1,746 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया, जो पिछले साल के ₹1,577 करोड़ के मुकाबले लगभग 11% ज्यादा है।
– कंपनी की बैलेंस शीट कैसी दिख रही है?
कंपनी की कुल संपत्ति अब ₹4.80 लाख करोड़ और नेट वर्थ ₹54,424 करोड़ तक पहुँच चुकी है। साथ ही, zero NPA और बेहतर NIM (1.53%) इसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दिखाते हैं।
– शेयर प्राइस में गिरावट क्यों आई?
नतीजे अच्छे रहे, लेकिन शेयर पहले से ही कमजोर तकनीकी स्थिति में था। यह अपने 50-day और 200-day EMA से नीचे ट्रेड कर रहा है। इसी वजह से नतीजों के बाद भी शेयर ~2.7% गिरकर ₹130.80 पर बंद हुआ।
– क्या अभी IRFC के शेयर में निवेश करना चाहिए?
विश्लेषक सलाह दे रहे हैं कि जब तक शेयर ₹136 के ऊपर न निकल जाए, तब तक नए निवेश से बचें। गिरावट पर यानी ₹130–₹120 के आसपास धीरे-धीरे खरीदारी की जा सकती है।
– IRFC का लंबी अवधि का प्रदर्शन कैसा रहा है?
पिछले 3–5 सालों में IRFC ने करीब 500% तक का रिटर्न दिया है। हालांकि पिछले एक साल में इसमें ~35% की गिरावट आई है।
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