अगर आप भी LIC के शेयर में निवेश कर रहे हैं या फिर निवेश करने की सोच रहे हैं, तो ये लेख आपके लिए उपयोगी हो सकता है। LIC (भारतीय जीवन बीमा निगम) देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी ही नहीं, बल्कि शेयर बाजार की एक बड़ी संस्थागत निवेशक भी है। इसकी शेयरहोल्डिंग हर तिमाही में बदलती रहती है, जिससे बाजार में हलचल भी होती है।
अगर पिछले एक साल की बात करें तो LIC के शेयर में करीब 23–24% तक की गिरावट आई है। इस दौरान इसका 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर ₹1,222 और निचला स्तर ₹715 रहा, यानी शेयर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

किन कंपनियों से LIC ने हाथ खींचा?
जून तिमाही (Q1 FY26) में LIC ने कुल 81 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई। खासतौर से Suzlon Energy, Reliance Power और Vedanta जैसे शेयरों से LIC ने दूरी बनाई है। ये वो शेयर हैं जो आमतौर पर रिटेल निवेशकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय माने जाते हैं।
इसके अलावा टेक्नोलॉजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों जैसे TCS, Infosys और Wipro में भी LIC ने हिस्सेदारी कम की है। ICICI Bank में भी क़रीब ₹1,987 करोड़ की हिस्सेदारी घटाई गई, जिससे वहां LIC की होल्डिंग 7.14% से घटकर लगभग 6.8% रह गई।
किन शेयरों में LIC ने निवेश बढ़ाया?
LIC ने 54 कंपनियों में अपनी होल्डिंग बढ़ाई है। इनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं – Patanjali Foods, Shyam Metalics, Bharat Forge, Asian Paints, Tata Chemicals और UCO Bank।
इनमें खास ध्यान देने वाली बात यह है कि:
- Patanjali Foods में हिस्सेदारी 5.2% से बढ़कर 7.7% तक पहुंच गई।
- Asian Paints में हिस्सेदारी 7.2% से 8.3% हो गई।
- Tata Chemicals में भी हिस्सेदारी 7.3% से बढ़कर 9.1% तक पहुंच गई।
इससे साफ है कि LIC अब ऐसे सेक्टर और कंपनियों में निवेश बढ़ा रहा है जो दीर्घकालिक स्थिरता और विकास की संभावना रखते हैं।
LIC की पोर्टफोलियो में दिख रहा है रणनीतिक बदलाव
LIC की हालिया गतिविधियों से यह स्पष्ट होता है कि अब वह छोटे और अस्थिर रिटेल-फोकस्ड शेयरों की बजाय ज्यादा स्थिर और दीर्घकालिक क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है। जैसे:
- डिफेंस
- बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं
- टेक्नोलॉजी
- रिलायंस और टाटा जैसे बड़े कॉर्पोरेट समूह
LIC का कुल पोर्टफोलियो लगभग ₹15 से ₹15.5 लाख करोड़ का है। इस पोर्टफोलियो में कई बड़े नाम पहले से शामिल हैं, जैसे – Reliance Industries (≈6.74%), HDFC Bank, ITC, SBI, L&T और NSE (जो अभी लिस्टेड नहीं है)।
डिफेंस सेक्टर में हालिया एंट्री और टेक्नोलॉजी व बैंकिंग में नई खरीददारी से साफ संकेत मिलता है कि LIC अब भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपने निवेश का रुख बदल रही है।
सरकार की हिस्सेदारी और भविष्य की योजना
LIC में अभी भी सरकार की हिस्सेदारी क़रीब 96.5% है, जो कि IPO के बाद भी ज़्यादा ही बनी हुई है। लेकिन अब DIPAM (Department of Investment and Public Asset Management) के तहत अगले 24 महीनों में सरकार 6.5% अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है।
इससे दो फायदे होंगे:
- सरकार को पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी।
- LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ेगी, जिससे उसका संस्थागत ढांचा और मज़बूत होगा।
निष्कर्ष
अगर हम सब बातों को मिलाकर देखें, तो LIC अब एक ज्यादा सोच-समझ कर चलने वाला संस्थागत निवेशक बनता जा रहा है। वो अब ट्रेडिंग वाले अस्थिर शेयरों से हटकर उन सेक्टरों में निवेश बढ़ा रहा है जो लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न दे सकते हैं।
सरकार की डिवेस्टमेंट नीति भी अब LIC को और अधिक बाज़ार-केंद्रित और पारदर्शी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। LIC की मौजूदा रणनीति दर्शाती है कि वह अब भविष्य की संभावनाओं पर आधारित क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। ऐसे में अगर आप LIC के शेयर में निवेशक हैं, तो इसकी होल्डिंग्स और रणनीतिक फैसलों पर नज़र बनाए रखना ज़रूरी होगा।
F.A.Q.
– 2025 में LIC का शेयर कितना गिर चुका है?
जुलाई 2025 तक LIC के शेयर में पिछले एक साल में करीब 23–24% की गिरावट दर्ज की गई है। इसका 52-सप्ताह का उच्च स्तर ₹1,222 और निम्न स्तर ₹715 रहा है।
– LIC किन कंपनियों से बाहर निकली है?
जून तिमाही (Q1 FY26) में LIC ने 81 कंपनियों से हिस्सेदारी घटाई है, जिनमें Suzlon Energy, Reliance Power, Vedanta, TCS, Infosys, और ICICI Bank जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
– किन शेयरों में LIC ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है?
LIC ने 54 कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाई है, जैसे Patanjali Foods, Asian Paints, Tata Chemicals, Bharat Forge, और Shyam Metalics। कुछ में हिस्सेदारी 2–3% तक बढ़ी है।
– सरकार LIC में कितनी हिस्सेदारी बेचने वाली है?
सरकार अगले 24 महीनों में अपनी 6.5% अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने की योजना पर काम कर रही है, ताकि सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाई जा सके और पूंजी जुटाई जा सके।
– क्या LIC की निवेश रणनीति में कोई बड़ा बदलाव आया है?
हाँ, LIC अब रिटेल-फोकस्ड, अस्थिर शेयरों से हटकर डिफेंस, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी और बड़े कॉर्पोरेट समूहों जैसे Reliance और Tata में निवेश बढ़ा रही है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी दीर्घकालिक स्थिरता पर ज़ोर दे रही है।
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