अगर आप शेयर मार्केट या स्टार्टअप से जुड़ी खबरें पढ़ते हैं, तो Shadowfax नाम आपने ज़रूर सुना होगा। खासकर पिछले कुछ समय में, जब कंपनी का IPO आया, तब यह नाम ज्यादा चर्चा में रहा। लेकिन Shadowfax असल में करती क्या है, इसका बिजनेस मॉडल कैसा है और शेयर मार्केट इसे कैसे देखता है, यही समझना ज़्यादा ज़रूरी है। चलिए इसे एक-एक करके समझते हैं।

Shadowfax का बिजनेस क्या है
Shadowfax एक भारतीय लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी कंपनी है। इसका काम ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए पार्सल डिलीवरी से जुड़ा हुआ है। इसमें फॉरवर्ड डिलीवरी, रिवर्स लॉजिस्टिक्स यानी रिटर्न पार्सल उठाना, और ऑन-डिमांड डिलीवरी जैसी सेवाएं शामिल हैं।
कंपनी का नेटवर्क देश के हजारों पिनकोड तक फैला हुआ है। Shadowfax के क्लाइंट्स में Flipkart, Meesho, Swiggy, Zepto जैसे बड़े नाम शामिल हैं। जब आप किसी ऐप से सामान ऑर्डर करते हैं और कुछ ही घंटों या दिनों में डिलीवरी मिल जाती है, तो कई बार उसके पीछे Shadowfax जैसी कंपनियां काम कर रही होती हैं।
Shadowfax का बिजनेस मॉडल समझिए
Shadowfax का मॉडल पारंपरिक लॉजिस्टिक्स कंपनियों से थोड़ा अलग है। यह कंपनी अपने नाम से ट्रक, बाइक या वेयरहाउस नहीं खरीदती। इसके बजाय यह गिग वर्कर्स के नेटवर्क और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करती है।
डिलीवरी पार्टनर अपने वाहन के साथ जुड़ते हैं और कंपनी का सॉफ्टवेयर पूरे ऑपरेशन को मैनेज करता है। कौन सा पार्सल किसे मिलेगा, किस रूट से जाएगा, और कितना समय लगेगा, यह सब डेटा के आधार पर तय होता है। इसी वजह से Shadowfax को एसेट-लाइट मॉडल वाली कंपनी कहा जाता है, जहां भारी पूंजी निवेश के बिना ऑपरेशन चलाया जाता है।
शेयर मार्केट के नजरिए से यह मॉडल जोखिम और अवसर दोनों लेकर आता है। लागत कम रहती है, लेकिन गिग वर्कर्स पर निर्भरता भी बढ़ जाती है।
Shadowfax IPO: कब और कैसे आया
Shadowfax ने जनवरी 2026 में अपना IPO लॉन्च किया। यह कंपनी का पहला मौका था जब उसने आम निवेशकों से पैसा जुटाया। IPO 20 जनवरी से 22 जनवरी 2026 तक खुला रहा।
शेयर का प्राइस बैंड ₹118 से ₹124 प्रति शेयर रखा गया था। कुल IPO साइज करीब ₹1,907 करोड़ का था। इसमें लगभग ₹1,000 करोड़ का हिस्सा फ्रेश इश्यू था, यानी यह पैसा सीधे कंपनी के बिजनेस में जाने वाला था। बाकी करीब ₹907 करोड़ ऑफर फॉर सेल के जरिए पुराने निवेशकों ने अपने शेयर बेचे।
IPO से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से भी पैसा जुटाया, जो करीब ₹856 करोड़ था। इन निवेशकों को शेयर ऊपरी प्राइस बैंड ₹124 पर दिए गए थे।
IPO सब्सक्रिप्शन और बाजार का मूड
सब्सक्रिप्शन की बात करें तो Shadowfax IPO को कुल मिलाकर करीब 2.7 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। यानी जितने शेयर उपलब्ध थे, उनकी तुलना में मांग लगभग तीन गुना रही।
IPO से पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम भी चर्चा में था। शुरुआत में GMP करीब 12 प्रतिशत तक दिखा, जिससे यह उम्मीद बनी कि शेयर लिस्टिंग पर थोड़ा ऊपर खुल सकता है। लेकिन जैसे-जैसे IPO आगे बढ़ा और निवेशकों ने नंबर देखे, GMP में भी ठंडापन आया।
यह अक्सर देखा जाता है कि IPO के आखिरी दिनों में बाजार का मूड बदल सकता है, खासकर जब वैल्यूएशन को लेकर सवाल उठते हैं।
लिस्टिंग पर क्या हुआ
28 जनवरी 2026 को Shadowfax के शेयर बाजार में लिस्ट हुए। लेकिन लिस्टिंग निवेशकों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। शेयर IPO प्राइस ₹124 के मुकाबले करीब 9 प्रतिशत नीचे खुले।
NSE पर शुरुआती भाव करीब ₹112 रहा, जबकि BSE पर यह लगभग ₹113 के आसपास खुला। इसका मतलब यह हुआ कि जिन्होंने लिस्टिंग गेन के लिए निवेश किया था, उन्हें शुरुआत में नुकसान दिखा।
ऐसी लिस्टिंग यह संकेत देती है कि बाजार ने कंपनी की वैल्यूएशन को लेकर थोड़ा सतर्क रुख अपनाया।
शेयर मार्केट इसे कैसे देखता है
जब कोई कंपनी इश्यू प्राइस से नीचे लिस्ट होती है, तो उसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। हो सकता है निवेशकों को लगा हो कि ग्रोथ के मुकाबले प्राइस ज्यादा रखा गया था। या फिर उस समय पूरे बाजार में ही दबाव रहा हो।
लेकिन सिर्फ लिस्टिंग डे से किसी कंपनी का भविष्य तय नहीं होता। IPO के बाद आने वाले तिमाही नतीजे, मुनाफे का रास्ता, कैश फ्लो और सेक्टर का माहौल, ये सब मिलकर तय करते हैं कि शेयर आगे क्या करेगा।
Shadowfax का बिजनेस बढ़ते ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स से जुड़ा है, जो लंबी अवधि में एक बड़ा बाजार है। अब देखना यह है कि कंपनी इस ग्रोथ को मुनाफे में कैसे बदलती है। शेयर मार्केट की नजर फिलहाल इसी पर टिकी हुई है।
Also read:-