जब भी कोई नया म्यूचुअल फंड लॉन्च होता है, तो सबसे पहली चीज जो हमारे सामने आती है, वो होती है ₹10 की नेट एसेट वैल्यू यानी एनएवी। निवेशकों को यह समझाया जाता है कि ये एक सस्ता मौका है – “अभी एंट्री लीजिए, बाद में महंगा हो जाएगा।” लेकिन क्या वाकई ₹10 की एनएवी का मतलब है कि फंड सस्ता है? या फिर ये सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक भ्रम है?
आइए इस लेख में इसी धारणा को परखते हैं, ताकि अगली बार जब कोई नया फंड ऑफर सामने आए, तो आप सोच-समझकर फैसला ले सकें।

₹10 की एनएवी सिर्फ एक नंबर है, कोई डिस्काउंट नहीं
बहुत से निवेशकों को लगता है कि ₹10 वाली एनएवी सस्ता सौदा है। लेकिन सच्चाई ये है कि एनएवी का कीमत से कोई लेना-देना नहीं होता जैसे शेयर प्राइस का होता है। म्यूचुअल फंड में एनएवी सिर्फ यह दिखाती है कि एक यूनिट की वैल्यू क्या है — ना कि वह सस्ता है या महंगा।
उदाहरण के लिए, अगर एक फंड की एनएवी ₹10 है और दूसरा ₹100 की है, और आप दोनों में ₹10,000 निवेश करते हैं, तो पहले वाले में आपको 1000 यूनिट मिलेंगी और दूसरे में 100 यूनिट। अगर दोनों ही फंड 1 साल में 20% बढ़ते हैं, तो दोनों की वैल्यू ₹12,000 हो जाएगी। यानी ग्रोथ पर कोई असर नहीं पड़ता कि एनएवी कितनी थी। फर्क बस संख्या का होता है, न कि रिटर्न का।
निवेश में मनोविज्ञान का भी बड़ा रोल होता है
हम सभी जब खरीदारी करते हैं, तो अक्सर ₹99 की चीज को ₹100 से सस्ता मानते हैं। यही आदत निवेश में भी आती है। ₹10 की एनएवी देखकर निवेशक सोचते हैं कि यह सस्ता है और इसमें आगे ग्रोथ की संभावना ज्यादा है।
म्यूचुअल फंड कंपनियां भी इस मनोविज्ञान को अच्छी तरह समझती हैं और उसी हिसाब से अपने नए फंड्स की मार्केटिंग करती हैं। इससे निवेशकों को लगता है कि अगर अब नहीं किया, तो मौका छूट जाएगा।
क्या फंड वाकई कुछ नया पेश कर रहा है?
नए फंड ऑफर में अक्सर ये बताया जाता है कि यह एक अलग रणनीति पर काम करेगा। लेकिन आपको खुद से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए — क्या यह फंड सच में कुछ नया कर रहा है? या फिर यह मार्केट में पहले से मौजूद फंड्स की ही कॉपी है?
अगर कोई नया फंड आपको सिर्फ ₹10 की एनएवी के भरोसे लुभा रहा है और उसकी निवेश रणनीति या फंड मैनेजर का रिकॉर्ड समझ में नहीं आ रहा, तो थोड़ा रुकना बेहतर हो सकता है।
सही निवेश का मतलब है समझदारी से किया गया निवेश
किसी भी फंड में पैसा लगाने से पहले सिर्फ एनएवी मत देखिए, बल्कि यह समझिए कि:
- फंड का उद्देश्य क्या है?
- फंड मैनेजर कौन है और उसका रिकॉर्ड कैसा है?
- फंड किन कंपनियों या सेक्टर्स में निवेश करता है?
- क्या यह फंड आपके निवेश लक्ष्यों के अनुकूल है?
और सबसे जरूरी बात – अगर यही फंड ₹95 की एनएवी पर होता, तो क्या आप तब भी उसमें निवेश करते? अगर जवाब हां है, तभी निवेश पर विचार कीजिए। वरना सिर्फ नाम देखकर निवेश करना भविष्य में नुकसान दे सकता है।
निष्कर्ष:
₹10 की एनएवी को सस्ता समझना एक आम धारणा है, लेकिन निवेश का फैसला सिर्फ इस आधार पर लेना सही नहीं है। म्यूचुअल फंड का चुनाव उसके ट्रैक रिकॉर्ड, निवेश रणनीति और आपके फाइनेंशियल गोल्स के हिसाब से होना चाहिए। समझकर किया गया निवेश ही लंबे समय में फायदा देता है।
F.A.Q.
– क्या कम एनएवी (₹10) वाला म्यूचुअल फंड सस्ता होता है?
नहीं। ₹10 की एनएवी का मतलब सिर्फ यह है कि फंड ने अभी शुरुआत की है। यह सस्ता या महंगा होने का पैमाना नहीं है। म्यूचुअल फंड की वैल्यू उसके प्रदर्शन और रणनीति से तय होती है, न कि उसकी यूनिट कीमत से।
– क्या ₹10 की एनएवी में निवेश करने से ज्यादा यूनिट मिलने का कोई फायदा होता है?
यूनिट ज्यादा मिलना मात्र एक गणना है। निवेश की कुल वैल्यू इस बात पर निर्भर करती है कि फंड कितना रिटर्न देता है, न कि आपने कितनी यूनिट खरीदीं।
– एनएवी और शेयर प्राइस में क्या अंतर है?
एनएवी म्यूचुअल फंड की प्रति यूनिट की बुक वैल्यू होती है, जबकि शेयर प्राइस बाजार में खरीदी-बिक्री के हिसाब से तय होता है। शेयर प्राइस सस्ता या महंगा हो सकता है, लेकिन म्यूचुअल फंड की एनएवी से ऐसा अंदाजा लगाना गलत है।
– क्या हर नया फंड एनएफओ में निवेश करना चाहिए?
जरूरी नहीं। हर एनएफओ में कुछ नया या बेहतर हो, ऐसा नहीं होता। पहले से बाजार में मौजूद फंड्स का ट्रैक रिकॉर्ड देखकर निवेश करना कई बार ज्यादा समझदारी भरा होता है।
– म्यूचुअल फंड चुनते समय सबसे जरूरी बात क्या है?
फंड मैनेजर का अनुभव, फंड की निवेश रणनीति, रिस्क प्रोफाइल और आपके वित्तीय लक्ष्य – ये सब बातों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। सिर्फ एनएवी देखकर निवेश करना सही तरीका नहीं है।
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