आज हम LIC (Life Insurance Corporation of India) के शेयरों और उससे जुड़ी हाल की खबरों को आसान भाषा में समझने की कोशिश करेंगे। LIC ऐसा नाम है जिसे शेयर बाजार में नए और पुराने दोनों निवेशक जानते हैं। कभी तिमाही नतीजों की वजह से चर्चा होती है, तो कभी सरकार से जुड़े फैसलों के कारण। यहाँ बात होगी सिर्फ ज़रूरी चीज़ों की, सीधे और साफ़ तरीके से।

LIC शेयर: अभी की स्थिति
पिछले कुछ हफ्तों में LIC का शेयर एक सीमित दायरे में घूमता दिखा है। मार्च और अप्रैल के आसपास आए तिमाही नतीजों के बाद शेयर में थोड़ी तेजी देखने को मिली थी। कुछ ब्रोकरेज रिपोर्ट्स ने भी कंपनी पर सकारात्मक नजरिया रखा, लेकिन इसके बावजूद शेयर में बहुत तेज मूवमेंट नहीं आया।
शेयर बाजार का यही स्वभाव है। जब कंपनी के आंकड़े उम्मीद से बेहतर होते हैं, तो शेयर को सहारा मिलता है। और जब किसी तरह की चिंता सामने आती है, चाहे वो नतीजों से जुड़ी हो या नीतियों से, तो शेयर थोड़ा पीछे भी जा सकता है। LIC के साथ भी यही देखने को मिल रहा है।
LIC शेयर ताज़ा तिमाही नतीजे और बाजार की प्रतिक्रिया
अब बात करते हैं हाल ही में आए तिमाही नतीजों की।
Q3 FY26 के नतीजे
LIC ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए, जिसमें कंपनी ने करीब ₹12,930 करोड़ का नेट प्रॉफिट बताया। यह आंकड़ा पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले लगभग 17% ज्यादा है।
नतीजे आने के बाद शेयर बाजार की पहली प्रतिक्रिया सकारात्मक रही और शेयर में करीब 4% तक की बढ़त देखी गई। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार ने इन नतीजों को ठीक-ठाक माना है।
प्रीमियम से होने वाली आय में सुधार और लागत पर नियंत्रण का असर इन आंकड़ों में दिखा। यही बातें निवेशकों के भरोसे को थोड़ा मजबूत करती हैं।
निवेशक इन नतीजों को कैसे देखते हैं
जब LIC जैसे बड़े संस्थान के नतीजे बेहतर आते हैं, तो निवेशकों को लगता है कि कंपनी का बिजनेस सही दिशा में है। इसका मतलब यह नहीं कि शेयर हर हाल में ऊपर ही जाएगा, लेकिन अच्छे नतीजे गिरावट को थामने का काम करते हैं।
दूसरी तरफ, अगर किसी तिमाही में कमाई कमजोर रहती है या टैक्स, नियम या किसी कानूनी मुद्दे से जुड़ी खबर आती है, तो शेयर पर दबाव बन सकता है। पहले भी ऐसा हो चुका है, जब टैक्स से जुड़ी चर्चाओं के दौरान LIC के शेयर में कमजोरी आई थी।
इसलिए सिर्फ एक तिमाही देखकर लंबा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होता।
सरकार और LIC का संबंध
LIC में सरकार की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। यही वजह है कि सरकार से जुड़े फैसलों का असर सीधे शेयर पर पड़ता है। समय-समय पर यह चर्चा होती रही है कि सरकार अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बाजार में बेच सकती है या आगे चलकर FPO ला सकती है।
अगर ऐसा कोई कदम उठाया जाता है, तो शेयर की कीमतों में हलचल देखी जा सकती है। इसके अलावा, सरकार का फोकस LIC की रियल एस्टेट संपत्तियों से बेहतर रिटर्न निकालने पर भी रहा है। इसका मकसद कंपनी की कुल आय को और संतुलित बनाना है।
शेयर की चाल में उतार-चढ़ाव क्यों रहता है
LIC का शेयर कई वजहों से ऊपर-नीचे होता है।
अच्छे तिमाही नतीजों पर शेयर को सपोर्ट मिलता है।
SEBI की ओर से पब्लिक होल्डिंग से जुड़ी समयसीमा बढ़ाने जैसी खबरों ने भी पहले शेयर को राहत दी थी।
वहीं, टैक्स या नियमों से जुड़ी नकारात्मक खबरों पर शेयर में गिरावट भी आई है।
इन सब बातों से एक चीज साफ होती है कि LIC का शेयर किसी एक खबर पर नहीं चलता। कई फैक्टर मिलकर इसकी दिशा तय करते हैं।
निवेश से पहले किन बातों पर ध्यान दें
अगर आप LIC के शेयर पर नजर रख रहे हैं, तो कुछ बातों को समझना ज़रूरी है।
कंपनी के तिमाही नतीजे लगातार कैसे आ रहे हैं।
सरकार की नीतियाँ और फैसले किस दिशा में जा रहे हैं।
बाजार का मनोभाव फिलहाल LIC को लेकर कैसा है।
ताज़ा Q3 नतीजों में मुनाफे की बढ़त जरूर दिखी है, और बाजार ने इसे सकारात्मक रूप में लिया है। लेकिन शेयर बाजार में स्थिरता कम और बदलाव ज्यादा होता है, यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए।
आखिर में बात सीधी है
LIC का शेयर बाजार में एक अहम जगह रखता है। इसके तिमाही नतीजे, सरकारी फैसले और बाजार का माहौल, तीनों मिलकर शेयर की चाल तय करते हैं। अगर आप LIC में दिलचस्पी रखते हैं, तो किसी एक खबर के आधार पर फैसला लेने से बेहतर है कि नियमित अपडेट और नतीजों को ध्यान से देखें। समझदारी इसी में है कि पूरे चित्र को देखकर ही अगला कदम तय किया जाए।
Also read:-