शेयर बाजार में अक्सर यह देखा जाता है कि कुछ सेक्टर्स में कंपनियों के बीच कड़ा मुकाबला होता है और कुछ सेक्टर्स ऐसे होते हैं जहां एक या दो कंपनियों का दबदबा बना रहता है। ऐसे लीडर स्टॉक्स जिनका मार्केट शेयर काफी मजबूत हो, उनसे उम्मीद रहती है कि उनकी कीमतें भी हमेशा ऊंची बनी रहें। लेकिन हाल ही में दो ऐसे स्टॉक्स — Pricol Limited और Indian Energy Exchange (IEX) — जिनका मार्केट शेयर लगभग ‘अनबीटेबल’ है, उनमें 20–25% तक की गिरावट देखने को मिली।
अब सवाल यह है कि क्या यह गिरावट सामान्य है, या फिर कुछ फंडामेंटल वजहें हैं जो इसे सही ठहराती हैं? चलिए इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए दोनों कंपनियों की हाल की कहानी को समझते हैं।

Pricol Limited: ऑटो कॉम्पोनेंट्स की एक मजबूत खिलाड़ी
Pricol Limited ऑटोमोबाइल सेक्टर में इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर्स और allied products बनाने वाली भारत की एक प्रमुख कंपनी है। टू-व्हीलर इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर्स के मामले में इसका भारतीय बाजार में 65% तक का हिस्सा है। ग्लोबली भी यह वॉल्यूम के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा निर्माता है।
कंपनी के दो मुख्य बिजनेस वर्टिकल हैं — पहला, ड्राइवर इंफॉर्मेशन और कनेक्टेड व्हीकल सॉल्यूशंस, जिसमें इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर्स, टेलीमेटिक्स और सेंसर आते हैं। दूसरा, एक्चुएशन, कंट्रोल और फ्लुइड मैनेजमेंट सिस्टम्स।
वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का रेवेन्यू लगभग ₹2,692 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 18.5% ज्यादा था। हालांकि, कर्मचारियों की लागत और अन्य खर्च तेज़ी से बढ़ने के कारण ऑपरेटिंग मार्जिन थोड़ा घटकर 11.6% पर आ गया। नेट प्रॉफिट में भी करीब 18% की वृद्धि दर्ज हुई।
आगे की योजना की बात करें तो कंपनी अपने कोर बिजनेस को 13–15% CAGR से बढ़ाने का लक्ष्य रख रही है। हाल ही में Sundaram Auto Components का अधिग्रहण और नए प्लांट्स पर निवेश इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
Indian Energy Exchange: बिजली ट्रेडिंग की बादशाह
Indian Energy Exchange यानी IEX बिजली और ऊर्जा से जुड़े सर्टिफिकेट्स का भारत में सबसे बड़ा ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है। यहां बिजली की खरीद और बिक्री पूरी तरह ऑटोमेटेड प्रोसेस के जरिए होती है।
वित्त वर्ष 2025 में IEX का बाजार हिस्सा लगभग 84% रहा। डे-अहेड मार्केट, रियल-टाइम मार्केट और ग्रीन एनर्जी मार्केट इसके मुख्य सेगमेंट्स हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में ₹537 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल से लगभग 19% ज्यादा था। ऑपरेटिंग मार्जिन 85% तक पहुंच गया और नेट प्रॉफिट भी 22% बढ़कर ₹429 करोड़ तक गया।
भले ही कंपनी का बिजनेस मॉडल एसेट-लाइट और कैश-जनरेटिव है, लेकिन हाल के महीनों में इसका शेयर प्राइस करीब 20% गिरा है। इसकी वजह कुछ नई नीतियां और अन्य एक्सचेंजेस की ओर से बढ़ता कॉम्पिटीशन माना जा रहा है।
गिरावट के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
दोनों कंपनियों की स्थिति देखकर लगता है कि उनके फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत हैं। Pricol के मामले में मार्जिन पर दबाव और कर्ज में बढ़ोतरी थोड़ी चिंता की बात है। साथ ही, ऑटो सेक्टर में रेयर-अर्थ मेटल्स की सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें भी उत्पादन पर असर डाल सकती हैं।
IEX के मामले में नए नियम, जैसे कि यूनिफ़ॉर्म प्राइसिंग और अन्य एक्सचेंजेस की हिस्सेदारी बढ़ना, इसके मार्केट शेयर और रेवेन्यू ग्रोथ को धीमा कर सकते हैं।
हालांकि, दोनों ही कंपनियों की लंबे समय के लिए रणनीतियां और इंडस्ट्री में पोजीशन काफी मजबूत दिखाई देती है।
निवेशकों के लिए क्या सीख?
Pricol और IEX जैसी कंपनियां अपने-अपने सेक्टर में अग्रणी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इनके शेयर प्राइस हमेशा चढ़ते ही रहेंगे। बाजार में करेक्शन आना सामान्य बात है, खासकर तब जब शॉर्ट टर्म में कुछ चुनौतियां सामने आती हैं।
निवेशकों को चाहिए कि वे ऐसे करेक्शन को पूरी तरह नकारात्मक न मानें और कंपनी के लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स और इंडस्ट्री ट्रेंड्स को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें।
F.A.Q.
– क्या मोनोपॉली वाली कंपनियों में निवेश करना सही होता है?
लंबी अवधि में मोनोपॉली कंपनियाँ स्थिर रिटर्न देती हैं, लेकिन कीमत सही होने पर ही खरीदना बेहतर होता है।
– क्या यह शेयरों में गिरावट का फायदा उठाकर निवेश करना चाहिए?
गिरावट में निवेश तभी करें जब कंपनी की फंडामेंटल्स मजबूत हों और वैल्यूएशन आकर्षक लगें।
– शेयर गिरने के बाद कितना समय लगता है रिकवरी होने में?
यह पूरी तरह मार्केट की स्थितियों, कंपनी की परफॉर्मेंस और निवेशक सेंटीमेंट पर निर्भर करता है। कुछ महीनों में भी रिकवरी हो सकती है, और कभी-कभी सालों भी लग सकते हैं।
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