अमेरिका ने हाल ही में भारतीय आयातित कपड़ों पर 50% तक का टैरिफ लागू कर दिया है। यह फैसला भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए बड़ा झटका है क्योंकि निर्यात पर इस सेक्टर की निर्भरता काफी अधिक है।
तिरुपुर, नोएडा और सूरत जैसे प्रमुख उत्पादन केंद्रों में इसका सीधा असर दिखने लगा है। कई फैक्ट्रियों का उत्पादन धीमा हो गया है और नए ऑर्डर मिलने में भी कठिनाई आ रही है।

टैरिफ के चलते शेयर बाजार में गिरावट, कपड़ा कंपनियों पर दबाव
अमेरिकी टैरिफ के ऐलान के तुरंत बाद भारतीय कपड़ा स्टॉक्स में गिरावट देखी गई। KPR Mill, Gokaldas Exports और Trident जैसी कंपनियों के शेयर नीचे फिसल गए।
कारण साफ है—अमेरिका भारतीय कुल कपड़ा निर्यात का लगभग 28% हिस्सा खरीदता है। जब आयात महंगा हो गया, तो भारतीय कंपनियों की मार्जिन पर सीधा दबाव पड़ा।
- KPR Mill का शेयर एक ही दिन में 6% टूट गया।
- Gokaldas Exports करीब 5% गिरा।
- Trident में भी कमजोरी रही।
निवेशकों को डर है कि अगर यह टैरिफ लंबे समय तक लागू रहा, तो आने वाले तिमाही नतीजों में इन कंपनियों के मुनाफे पर असर साफ दिखेगा।
सरकार की राहत और रणनीति
सरकार ने स्थिति को समझते हुए तुरंत कदम उठाए। कपड़ा उद्योग को राहत देने के लिए कपास आयात पर लगने वाले शुल्क में छूट की अवधि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी गई। इसका फायदा यह होगा कि घरेलू बाजार में कच्चे माल की उपलब्धता बनी रहेगी और कंपनियों की लागत कुछ हद तक कम हो जाएगी।
इस कदम का असर शेयर बाजार में भी दिखा। Vardhman Textiles के शेयर में 10% से ज्यादा तेजी आई। निवेशकों को यहां थोड़ी राहत मिली कि सरकार हालात पर नजर रखे हुए है।
लेकिन केवल शुल्क छूट से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। यही वजह है कि सरकार ने बहुआयामी रणनीति बनाई है। इसमें अमेरिका पर निर्भरता घटाकर यूरोप और एशिया के अन्य बाजारों में निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों को टारगेट किया जा रहा है। इन देशों का कुल कपड़ा और परिधान आयात 590 अरब डॉलर से ज्यादा है। अगर भारतीय कंपनियां यहां अपनी मौजूदगी मजबूत करती हैं, तो अमेरिकी टैरिफ का असर कुछ हद तक संतुलित हो सकता है।
आगे की चुनौतियां और निवेशकों के लिए संकेत
सरकार जीएसटी ढांचे में सुधार पर भी विचार कर रही है ताकि उद्योग को स्थिरता और गति मिल सके। टैक्स ढांचा आसान होगा तो कारोबारियों और निवेशकों दोनों का भरोसा बढ़ेगा।
निवेशकों के नजरिये से देखें, तो स्थिति अभी मिश्रित है। जो कंपनियां अमेरिका पर ज्यादा निर्भर हैं, उन पर दबाव बना रहेगा। वहीं जिन कंपनियों ने पहले से यूरोप और एशिया में कारोबार बढ़ाया है, उनके पास नए अवसर होंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिकी टैरिफ एक अल्पकालिक झटका है। भारत सरकार की रणनीतियां और कंपनियों की अनुकूलन क्षमता इस चुनौती से निपटने में मदद करेंगी। हालांकि, असली सवाल यह है कि भारत-अमेरिका व्यापारिक तनाव कितने समय तक चलता है।
अगर जल्द बातचीत से हल निकलता है, तो कपड़ा उद्योग दोबारा पटरी पर आ सकता है। लेकिन अगर यह स्थिति लंबी खिंच गई, तो उत्पादन, रोजगार और स्टॉक्स तीनों पर दबाव बढ़ेगा।
निष्कर्ष
अमेरिकी टैरिफ से भारतीय कपड़ा उद्योग फिलहाल मुश्किल दौर से गुजर रहा है। फैक्ट्रियों से लेकर शेयर बाजार तक असर साफ दिख रहा है। KPR Mill, Gokaldas Exports और Trident जैसी कंपनियों पर दबाव बना हुआ है, जबकि Vardhman Textiles को सरकार के राहत कदम से फायदा मिला है।
निवेशकों के लिए फिलहाल यही सलाह है कि कपड़ा स्टॉक्स में जल्दबाजी में फैसले न लें। आने वाले तिमाही नतीजे और सरकार की नई घोषणाएं तस्वीर को और साफ करेंगी।
F.A.Q.
– अमेरिका ने भारतीय कपड़ा उद्योग पर कितना टैरिफ लगाया है?
अमेरिका ने भारतीय कपड़ा उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लागू किया है।
– इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित कंपनियां कौन सी हैं?
KPR Mill, Gokaldas Exports और Trident जैसी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है।
– भारत सरकार ने राहत के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने कपास आयात पर लगने वाले शुल्क में छूट की अवधि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी है, ताकि कच्चे माल की लागत कम हो सके।
– किन कंपनियों को सरकार के कदम का फायदा हुआ है?
Vardhman Textiles जैसी कंपनियों के शेयरों में 10% से अधिक की तेजी देखी गई है।
– क्या अमेरिकी टैरिफ का असर लंबे समय तक रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक अल्पकालिक झटका हो सकता है। अगर भारत सरकार की रणनीतियां सफल रहीं और नए बाजारों में निर्यात बढ़ा, तो असर कम हो जाएगा।
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