टेक्सटाइल सेक्टर की जानी-मानी कंपनी Vardhman Textiles गुरुवार को शेयर बाज़ार में सुर्खियों में रही। कंपनी के शेयरों में एक ही दिन में 13% से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई। निवेशकों की यह बढ़ी हुई दिलचस्पी किसी अफवाह या अल्पकालिक ट्रेडिंग के कारण नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सरकार का एक अहम फैसला था।
केंद्र सरकार ने कच्चे कपास के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में छूट को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 तक कर दिया है। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो कपास को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करती हैं, और Vardhman Textiles उनमें से एक बड़ी खिलाड़ी है।

सरकार का फैसला और टेक्सटाइल सेक्टर पर सीधा असर
भारत में कपड़ा उद्योग लंबे समय से महंगे कच्चे माल की समस्या झेल रहा है। खासकर कपास, जो इस उद्योग का सबसे अहम हिस्सा है। सरकार ने पहले 30 सितंबर 2025 तक आयात शुल्क में छूट दी थी, लेकिन अब इसे तीन महीने और बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 कर दिया गया है।
यह राहत कंपनियों की लागत घटाने में मदद करेगी। उदाहरण के लिए, जब कच्चा कपास सस्ता मिलेगा तो यार्न और फैब्रिक बनाने की लागत भी कम होगी। इसका फायदा न केवल कंपनियों को होगा बल्कि निर्यात में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। यही कारण है कि जैसे ही यह खबर आई, बाजार में खरीदारी का माहौल बन गया और Vardhman Textiles का स्टॉक तेजी से ऊपर चढ़ गया।
Vardhman Textiles शेयर प्रदर्शन: एक दिन का पूरा हाल
गुरुवार के दिन स्टॉक ₹395.05 पर खुला और धीरे-धीरे बढ़ते हुए इंट्रा-डे में ₹444.80 के स्तर तक पहुंच गया। कारोबार खत्म होते-होते यह ₹450 पर बंद हुआ। यानी पिछले दिन के मुकाबले लगभग 13% की बढ़त।
इतनी बड़ी तेजी अक्सर तब देखने को मिलती है जब किसी कंपनी से जुड़ी बड़ी खबर आती है। इस मामले में निवेशकों ने सरकार के फैसले को भविष्य के मुनाफे की उम्मीद से जोड़ा और खरीदारी तेज कर दी। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह बढ़त ऐसे समय में आई जब कंपनी के हालिया नतीजे बहुत मजबूत नहीं थे।
वित्तीय स्थिति और मौजूदा चुनौतियाँ
जून 2025 की तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 13.14% घटकर ₹207.17 करोड़ रह गया था। वहीं राजस्व में हल्की बढ़त दर्ज हुई और यह ₹2,385.66 करोड़ तक पहुंचा। यानी राजस्व तो बढ़ा लेकिन मुनाफे पर दबाव बना रहा।
इसका बड़ा कारण बढ़ती लागत और वैश्विक बाजार की चुनौतियाँ हैं। अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय निर्यातकों पर असर डाला है और मांग में भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में सरकार का यह कदम कंपनियों के लिए राहत लेकर आया है। उम्मीद है कि इनपुट लागत कम होने से आने वाले नतीजों में सुधार दिख सकता है।
निवेशकों के लिए मायने
Vardhman Textiles लिमिटेड, वर्धमान समूह की प्रमुख कंपनी है और इसे भारत की सबसे बड़ी एकीकृत कपड़ा निर्माता कंपनियों में गिना जाता है। इसका कारोबार यार्न और फैब्रिक के उत्पादन में फैला हुआ है और इसका मुख्यालय लुधियाना, पंजाब में स्थित है। कंपनी का स्टॉक NSE पर ‘VTL’ और BSE पर ‘502986’ के नाम से ट्रेड होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कपास आयात पर ड्यूटी में छूट से टेक्सटाइल कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन इसके बावजूद निवेशकों को यह समझना चाहिए कि यह राहत अस्थायी है और वैश्विक स्तर पर मौजूद चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। इसलिए किसी भी निवेश से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम सहनशक्ति का आकलन करना ज़रूरी है।
निष्कर्ष
गुरुवार को आई तेजी ने यह साबित कर दिया कि सरकारी फैसले कैसे शेयर बाजार की धारणा बदल सकते हैं। Vardhman Textiles को इस खबर से सीधा फायदा मिला और निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत हुआ। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि घटती लागत का असर कंपनी के नतीजों में कितना झलकता है।
F.A.Q.
– Vardhman Textiles के शेयरों में अचानक तेजी क्यों आई?
गुरुवार को कंपनी के शेयरों में 11% से ज्यादा की तेजी इसलिए आई क्योंकि सरकार ने कच्चे कपास के आयात पर ड्यूटी में छूट की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 तक कर दी है। इससे कंपनी की लागत घटने की उम्मीद है।
– सरकार का यह फैसला टेक्सटाइल कंपनियों को कैसे फायदा देगा?
ड्यूटी छूट से कपास आयात सस्ता होगा। जब कच्चा माल सस्ता मिलेगा तो कंपनियों की उत्पादन लागत कम होगी और वे वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन पाएंगी।
– कंपनी की हाल की वित्तीय स्थिति कैसी रही है?
जून 2025 की तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 13.14% घटकर ₹207.17 करोड़ रहा, जबकि राजस्व बढ़कर ₹2,385.66 करोड़ तक पहुंच गया। यानी आय बढ़ी लेकिन मुनाफा दबाव में रहा।
– क्या अभी Vardhman Textiles में निवेश करना सही है?
ड्यूटी छूट का फायदा जरूर मिलेगा, लेकिन निवेश का फैसला आपकी जोखिम क्षमता और समय-सीमा पर निर्भर करता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी निवेश से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और सलाहकार की राय जरूर लें।
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