Vedanta Resources पर अमेरिका से हमला! क्या दिवालिया हो जाएगी कंपनी?

आज हम बात करेंगे Anil Agarwal और उनकी कंपनी Vedanta Resources Limited के बारे में। आपने अनिल अग्रवाल के इंटरव्यू और वीडियो सोशल मीडिया पर जरूर देखे होंगे, जहां वह अपनी कहानी बताते हैं कि कैसे पटना से कबाड़ बेचकर शुरुआत की, फिर 19 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे और वहां से कारोबार को इतना बढ़ाया कि लंदन स्टॉक एक्सचेंज तक पहुंच गए।

आज उनकी संपत्ति का अनुमान करीब 35,000 करोड़ रुपये है और वह Vedanta Resources Limited के चेयरमैन हैं। लेकिन इस सपनों जैसी कहानी पर अब अमेरिका की रिसर्च कंपनी Viceroy Research ने सवाल उठा दिए हैं। आइए, पूरे मामले को चार हिस्सों में समझते हैं।

vedanta resources anil agarwal crisis viceroy report hindi

पटना से लंदन तक: अनिल अग्रवाल का प्रेरक सफर

अनिल अग्रवाल का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता। पटना में कबाड़ बेचते हुए उन्होंने बिज़नेस शुरू किया। फिर एक सूटकेस लेकर मुंबई पहुंचे और धातुओं (metals) के कारोबार में कदम रखा। धीरे-धीरे उनका व्यापार इतना बढ़ा कि उन्होंने लंदन में Vedanta Resources Limited को लिस्ट करवा दिया। भारत में Vedanta Limited, Hindustan Zinc, BALCO, Cairn Oil & Gas जैसी कंपनियां उनके ग्रुप का हिस्सा हैं।

Vedanta Group मुख्य रूप से जिंक, तांबा (copper), एल्यूमीनियम, स्टील, बिजली उत्पादन और तेल-गैस के कारोबार में है।

Viceroy Research का आरोप: Vedanta Resources दिवालिया होने का खतरा?

हाल ही में अमेरिका की रिसर्च कंपनी Viceroy Research ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा कि अनिल अग्रवाल की पैरेंट कंपनी Vedanta Resources Limited (VRL) की माली हालत अच्छी नहीं है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि VRL के पास खुद का कोई कारोबार नहीं है और उसने ₹400 करोड़ का कर्ज ले रखा है। यह कर्ज वह भारत में लिस्टेड कंपनियों से मिले डिविडेंड और ब्रांड फीस के जरिए चुकाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगर डिविडेंड आना बंद हो जाए, तो VRL के लिए कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा और कंपनी दिवालिया हो सकती है।

डिविडेंड और कर्ज पर सवाल

Viceroy Research का दावा है कि Vedanta Limited और बाकी कंपनियां पिछले कुछ सालों में VRL को भारी डिविडेंड देती रही हैं। उदाहरण के लिए, पिछले तीन साल में VRL को करीब ₹2,000 करोड़ का डिविडेंड मिला है। इस डिविडेंड से ही कंपनी अपना कर्ज चुकाती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि Vedanta Limited खुद भी डिविडेंड देने के लिए कर्ज लेती है। इसी वजह से कर्ज बढ़ता जा रहा है और ब्याज दरें 15–16% तक पहुंच रही हैं। Viceroy का कहना है कि यह पूरी तरह से एक तरह की पोंजी स्कीम जैसी लगती है, जहां पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए पैसे लाए जाते हैं।

Vedanta का जवाब और आगे का रास्ता

Vedanta Resources ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है। कंपनी ने कहा कि सभी जानकारी पहले से सार्वजनिक है और छिपाने जैसा कुछ भी नहीं है। कंपनी का यह भी कहना है कि Viceroy ने जानबूझकर ऐसी रिपोर्ट तैयार की ताकि उसे बॉन्ड्स में ली गई शॉर्ट पोजिशन से फायदा हो।

हमें याद रखना चाहिए कि ऐसा ही कुछ Hindenburg Research ने Adani Group के साथ भी किया था। उस रिपोर्ट के बाद शेयरों में गिरावट जरूर आई थी, लेकिन धीरे-धीरे रिकवरी भी हुई। इसी तरह VRL के बॉन्ड्स और शेयरों में भी शुरुआती गिरावट के बाद सुधार दिखने लगा है।

निष्कर्ष:

अनिल अग्रवाल का सफर बेशक प्रेरक रहा है, लेकिन कारोबार में उतार-चढ़ाव और विवाद भी आते रहते हैं। इस बार की चुनौती कितनी गंभीर है, इसका पता आने वाले समय में चलेगा। फिलहाल, Vedanta Group की तरफ से कहा गया है कि वह सभी कर्ज चुकाने में सक्षम है और कारोबार सामान्य रूप से चल रहा है।

F.A.Q.

– Vedanta Resources Limited (VRL) क्या है?

Vedanta Resources Limited अनिल अग्रवाल की होल्डिंग कंपनी है, जो लंदन में रजिस्टर्ड है। यह Vedanta Group की पेरेंट कंपनी है और भारत में लिस्टेड कंपनियों जैसे Vedanta Limited, Hindustan Zinc, BALCO आदि में हिस्सेदारी रखती है।

– Viceroy Research ने क्या आरोप लगाए हैं?

Viceroy Research का दावा है कि VRL के पास खुद का कोई ठोस बिजनेस नहीं है। वह भारत में लिस्टेड कंपनियों से डिविडेंड और ब्रांड फीस के जरिए कर्ज चुकाती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि VRL भारी कर्ज में डूबी हुई है और दिवालिया होने की कगार पर है।

– Vedanta Group का मुख्य कारोबार क्या है?

Vedanta Group मुख्य रूप से खनन (mining) और धातु (metals) का कारोबार करता है। यह जिंक, तांबा, एल्यूमिनियम, स्टील, तेल-गैस और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है।

– कंपनी ने Viceroy के आरोपों पर क्या जवाब दिया?

Vedanta Resources ने इन आरोपों को बेबुनियाद और गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि उसके सभी वित्तीय आंकड़े पहले से सार्वजनिक हैं और उसने कोई जानकारी छुपाई नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि रिपोर्ट का मकसद जानबूझकर नुकसान पहुंचाना है।

– क्या इस विवाद का असर Vedanta Limited के शेयरों पर पड़ा?

हां, जब Viceroy की रिपोर्ट सामने आई तो शुरुआत में Vedanta Limited और ग्रुप की अन्य कंपनियों के शेयरों और बॉन्ड्स में गिरावट आई। लेकिन बाद में बाजार में कुछ रिकवरी भी देखी गई।

Also read:-

Author Box
  • Manoj Talukdar

    नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम मनोज तालुकदार है, और मैं लम्बे समय से शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड जैसे निवेश से जुड़े क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रहा हूं। इस दौरान मैंने जो अनुभव और ज्ञान अर्जित किया है, उसे मैं आप सभी के साथ इस वेबसाइट के माध्यम से साझा करना चाहता हूं। मेरा उद्देश्य है कि इस वेबसाइट के जरिए आपको निवेश से जुड़ी सही और उपयोगी जानकारी प्रदान कर सकूं, ताकि आप अपने निवेश निर्णयों को बेहतर बना सकें।

Leave a Comment

Join Our WhatsApp Group!