डॉ. मनमोहन सिंह, जिन्हें भारत के सबसे प्रभावशाली और कुशल नेताओं में से एक माना जाता है, का योगदान भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज पर अमिट छाप छोड़ गया है। 26 सितंबर 1932 को पंजाब प्रांत के गाह में जन्मे डॉ. सिंह का निधन भी 26 तारीख को ही हुआ। आज उनके विचार, नीतियां, और आर्थिक सुधार न केवल प्रेरणा देते हैं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति की नींव भी हैं।
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आरबीआई गवर्नर के रूप में योगदान (1982-1985)
डॉ. मनमोहन सिंह ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 13वें गवर्नर के रूप में अहम भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में मानीटरी पॉलिसी में सुधार किए गए, और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए गए।
उनका सबसे बड़ा योगदान था सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को स्वायत्तता प्रदान करना। इससे बैंक सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम हुए। इसके अलावा, नकली नोटों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए नए बैंक नोट जारी किए गए, जिससे बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक बनाने में मदद मिली।
1991 के आर्थिक सुधार और वित्त मंत्री का कार्यकाल
1991 में, जब भारत गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, डॉ. सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया गया। देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार केवल दो हफ्तों के आयात के लिए पर्याप्त था। इस संकट का सामना करने के लिए उन्होंने साहसिक कदम उठाए।
उन्होंने 1991 का ऐतिहासिक बजट पेश किया, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी। लाइसेंस राज को समाप्त कर, विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया गया, और उद्योगों के लिए लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को कम किया गया।
यहां तक कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव ने कहा था, “अगर चीजें सही हुईं तो हम सभी इसका श्रेय लेंगे, और अगर नाकाम हुए तो डॉ. सिंह को दोषी ठहराया जाएगा।” बावजूद इसके, डॉ. सिंह ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे और देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाला।
प्रधानमंत्री के रूप में ऐतिहासिक कार्य (2004-2014)
डॉ. मनमोहन सिंह 2004 में भारत के 14वें प्रधानमंत्री बने और दो कार्यकालों तक इस पद पर रहे। उनके नेतृत्व में भारत ने 9% GDP वृद्धि दर जैसी उपलब्धियां हासिल कीं।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) लागू करना शामिल है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े। इसके अलावा, अमेरिका के साथ न्यूक्लियर एग्रीमेंट ने भारत को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ाया।
शिक्षा और सामाजिक कल्याण में योगदान
डॉ. सिंह के कार्यकाल में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू किया गया। इसके तहत सर्व शिक्षा अभियान ने प्राथमिक शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाया, जिससे साक्षरता दर में सुधार हुआ।
2013 में पारित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने देश की दो-तिहाई आबादी को अनाज पर सब्सिडी प्रदान की। इससे गरीब वर्ग को खाद्य सुरक्षा मिली और उनकी जीवनशैली में सुधार हुआ।
डॉ. मनमोहन सिंह की विरासत
डॉ. मनमोहन सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण और वैश्वीकरण के रास्ते पर आगे बढ़ाया। उनके सुधारों ने भारत को आर्थिक स्थिरता और प्रगति की दिशा में अग्रसर किया। आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी नीतियां और दृष्टिकोण देश को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।
आपको डॉ. मनमोहन सिंह के कौन से कार्य सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं? अपने विचार हमें जरूर साझा करें।
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