ईरान-इजराइल टेंशन से भारतीय बाज़ार धड़ाम! जानिए पांच बड़े कारण और उनका प्रभाव

मध्य पूर्व में भयावह स्थिति में शेयर बाजार सोमवार, 16 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट के साथ अंत में सेंसेक्स ने 845 अंकों की गिरावट की और 73,399.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी ने 247 अंकों की गिरावट के साथ 22,272.50 पर रुका। इस गिरावट के कारण बीएससी में लिस्टेड कंपनियों की मार्केट कैप एक झटके में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये घटते हुवे नजर आया हैं। इस गिरावट का मुख्य क्या क्या कारण है आइए इसके बारे में बिस्तार से जानते है:-

बाज़ार की गिरावट का पांच मुख्य कारण

बाज़ार की गिरावट का पांच मुख्य कारण

ईरान और इजराइल के बीच जंग ने निवेशकों के सेंटिमेंट को काफी कमजोर किया है, ऑयल एंड गैस को छोड़कर बाकी BSE के सभी सेक्टरल इंडेक्स लाल निशान में चले गए हैं इसकी वजह से पुरे मार्किट का सेंटिमेंट नेगेटिव हो गया है। आइए जानते है मार्किट की इस नेगेटिव सेंटिमेंट का मुख्य कारण:-

1. ईरान और इजराइल के बीच जंग:-

अधिकांश विश्लेषकों का कहना है कि सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ी मुख्य कारण ईरान और इजराइल की युद्ध रहा। इस जंग के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशक लगातर बाजार से पैसा निकाल रहे है, इससे गिरावट काफी तेजी से बढ़ गई हैं।

ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की शुरुआत सीरिया में एक ईरानी दूतावास पर हमले से हुई जिसके पीछे इजराइल का हाथ है। इस हमले में ईरान के दो जनरलों सहित सात लोगों की मौत हो गई। इसके दो हफ्ते बाद ईरान ने इजराइल पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए हैं।

यह पहली बार है जब ईरान ने इजराइल के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई की है। अब इसके बाद आने वाले दिनों में इजराइल भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है, जिससे भारतीय बाज़ार में भी आनेवाले दिनों में भी काफी ज्यादा नेगेटिव माहौल देखने को मिल सकता हैं।

2. क्रूड ऑयल के दाम

ईरान और इजराइल के बीच यदि युद्ध लंबा हुआ तो क्रूड ऑयल के दाम बढ़ सकते हैं। इसके विपरीत, बाजार को डर है कि युद्ध के चलते पूरे मध्य पूर्व में क्रूड से जुड़ा यातायात प्रभावित हो सकता है, इसका असर भारतीय शेयर मार्किट में भी अलग अलग सेक्टर के अन्दर देखने को जरुर मिलेगा।

3. अमेरिकी डॉलर में तेजी

अमेरिकी डॉलर में मजबूती जारी है और डॉलर इंडेक्स 106 के करीब है। भारतीय रुपया भी 6 पैसे की गिरावट के साथ 83.6 प्रति डॉलर पर रुका है। इसके अलावा, अमेरिका में महंगाई के आंकड़े भी अर्थशास्त्रियों के अनुमान से अधिक हैं, जिससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की संभावना कमजोर हुई है।

4. भारत मोरिशियस टैक्स समझौता

भारत ने मोरिशियस के साथ Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA) में संशोधन किया है जिससे टैक्स में छूट के दुरुपयोग और चोरी को रोका जा सकता है। इस समझौते में एक प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट यानी पीपीटी नाम का क्लॉज जोड़ा गया है, जो कहता है कि अगर व्यक्ति या संस्था ने जिस टैक्स बचाने के मकसद से लेनदेन या समझौता किया है तो उस पर DTAA की शर्तें लागू नहीं होंगी। इसे मोरिशियस के रास्ते भारतीय शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले एफपीआई के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

5. ग्लोबल संकेत

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद ग्लोबल मार्केटों में भी बिकवाली देखी गई है। अमेरिकी बाजार भी शुक्रवार को लाल निशान में बंद हुए थे, जबकि एशियाई बाजारों में जापान के निक्की 225, हांगकांग का हंग सेंग, और दक्षिण कोरिया का कॉस्पी नुकसान में थे, ग्लोबल नेगेटिव संकेतो के कारण भारतीय बाज़ार में भी आपको आनेवाले समय के अन्दर थोड़ा बहुत गिरावट की पूरी आशंका नजर आती हैं।

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